जांच में पता चला कि वो लिफाफा प्रिया की बहन, नेहा मेहता ने भेजा था।
नेहा को अपनी बहन की मौत पर शक था। उसने प्राइवेट डिटेक्टिव रखा था जिसने राजीव की पूरी जिंदगी छान मारी।
जब नेहा को पक्के सबूत मिल गए, तो उसने सीधे पुलिस में न जाकर पहले मीरा को सच बताने का फैसला किया। क्योंकि नेहा को लगा कि मीरा भी राजीव का अगला शिकार बन सकती है।
और वो गलत नहीं थी।
कोर्ट ने राजीव कुमार शर्मा को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई।
मीरा भाभी की शादी कोर्ट ने रद्द कर दी क्योंकि वो कानूनी रूप से वैध नहीं थी।
आज तीन महीने बाद मैं मीरा भाभी से मिला। वो अब अपने माता-पिता के साथ रह रही हैं। एक NGO में काउंसलर का काम कर रही हैं – उन महिलाओं की मदद करती हैं जो डोमेस्टिक वायलेंस का शिकार हैं।
“अर्जुन, उस रात तुमने दरवाजा नहीं खोला होता तो आज मैं शायद…” उनकी आँखें नम हो गईं।
“भाभी, आपको धन्यवाद देने की जरूरत नहीं। मैंने वही किया जो सही था।”
“और नेहा का भी शुक्रिया।” उन्होंने कहा। “अगर उसने वो लिफाफा नहीं भेजा होता तो मुझे कभी सच पता नहीं चलता।”
मैं चुप रहा।
कभी-कभी सच जानना जरूरी होता है, चाहे वो कितना भी कड़वा क्यों न हो।
समापन
आज भी जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
एक इंसान दूसरी जिंदगी जी सकता है। अपने अपराध को छुपा सकता है। लेकिन सच हमेशा सामने आता है।
मीरा भाभी ने अपनी जिंदगी फिर से शुरू की। नेहा को उसकी बहन का न्याय मिला। और राजीव को उसके गुनाह की सजा।
यह कहानी हमें सिखाती है कि:
- घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है
- संदिग्ध परिस्थितियों में चुप नहीं रहना चाहिए
- सच कितना भी दबा हो, एक दिन सामने आता है













