मीरा भाभी ने अपने फोन पर कुछ ढूंढा और मुझे एक न्यूज़ आर्टिकल दिखाया।
“नासिक की युवती प्रिया मेहता 4 साल से लापता, पुलिस अभी भी सुराग ढूंढ रही है”
आर्टिकल 2020 का था। प्रिया की तस्वीर भी थी – वही महिला जो राजीव भैया के साथ शादी की फोटो में थी।
“ये… ये तो गायब हो गई थी?” मैंने हैरानी से पूछा।
“हाँ। शादी के दो साल बाद।” भाभी बोलीं। “और अब सोचो, उसी साल राजीव ने मुझसे शादी की।”
मेरी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।
“भाभी, आपको क्या लगता है… राजीव भैया का इससे कोई लेना-देना है?”
“मुझे नहीं पता, अर्जुन। लेकिन आज जब मैंने उनसे पूछा कि प्रिया कहाँ है, तो उनके चेहरे पर जो भाव आए… वो डर नहीं, गुस्सा था। जैसे मैंने कोई बहुत बड़ा राज़ उजागर कर दिया हो।”
मैंने घड़ी देखी। रात के 3 बज चुके थे।
“भाभी, हमें पुलिस में जाना चाहिए।”
“नहीं!” भाभी घबरा गईं। “अगर राजीव को पता चला कि मैंने पुलिस को बताया तो—”
तभी मेरे फ्लैट की घंटी बजी।
हम दोनों जम गए।
फिर दरवाजे पर ज़ोर से दस्तक हुई। “अर्जुन! दरवाजा खोलो!”
राजीव भैया की आवाज़ थी।
मीरा भाभी का चेहरा पीला पड़ गया। “उन्हें कैसे पता चला कि मैं यहाँ हूँ?”
मैं धीरे से दरवाजे की ओर बढ़ा। आईहोल से झाँका।
राजीव भैया बाहर खड़े थे। लेकिन वो अकेले नहीं थे। उनके साथ दो और आदमी थे। गुंडों जैसे दिख रहे थे।
“अर्जुन! मुझे पता है मीरा अंदर है। उसे बाहर भेजो वरना मैं दरवाजा तोड़ दूंगा।”
मैंने पीछे मुड़कर भाभी को देखा। वो डर से काँप रही थीं।
अब मुझे एक फैसला लेना था।













