मैंने गहरी सांस ली। दरवाजे पर दस्तक तेज़ होती जा रही थी।
“अर्जुन! आखिरी बार कह रहा हूँ!”
मैंने झट से अपना फोन उठाया और 100 डायल किया। फिर भाभी से कहा – “बाथरूम में जाकर दरवाजा लॉक कर लीजिए। कुछ भी हो जाए, बाहर मत निकलिएगा।”
भाभी बाथरूम की तरफ भागीं।
मैंने दरवाजा खोला। राजीव भैया ने झट से अंदर घुसने की कोशिश की लेकिन मैं बीच में खड़ा हो गया।
“भैया, इस वक्त? क्या बात है?”
“तू जानता है क्या बात है। मीरा कहाँ है?” उनकी आँखें लाल थीं। शराब की बदबू आ रही थी।
“भाभी यहाँ नहीं हैं। और अगर होतीं भी तो मैं उन्हें आपके साथ नहीं जाने देता। कम से कम इस हालत में तो बिल्कुल नहीं।”
राजीव भैया ने मेरा कॉलर पकड़ लिया। “तेरी इतनी हिम्मत? मेरे घर के मामले में—”
“आपके घर के मामले?” मैंने उनका हाथ झटका। “या प्रिया मेहता के मामले में?”
प्रिया का नाम सुनते ही राजीव भैया का चेहरा बदल गया। पीछे खड़े दोनों गुंडे भी सतर्क हो गए।
“तो तुझे पता चल गया।” राजीव भैया ने एक अजीब मुस्कान के साथ कहा। “अच्छा हुआ। अब तुझे भी चुप कराना पड़ेगा।”
उन्होंने पीछे मुड़कर इशारा किया। दोनों गुंडे अंदर घुसने लगे।
लेकिन तभी नीचे से पुलिस की गाड़ी की सायरन सुनाई दी।
राजीव भैया की आँखों में घबराहट आ गई। “तूने पुलिस को बुलाया?”
“हाँ। और बेहतर होगा कि आप यहीं रुकें। भागने की कोशिश मत करिएगा।”
लेकिन राजीव भैया और उनके साथी सीढ़ियों की तरफ भागे।
पुलिस ने उन्हें नीचे पकड़ लिया।













